बस जनाज़े पे तू ही मेरे पास हो
उस कफ़न में मिरे बस तेरी बास हो
पास हैं तेरे तो लाख मद्दाह पर
चाहने वाला इक मेरे भी पास हो
मैं जता दूँगा यारो मोहब्बत ये पर
उस के हाँ करने की कोई तो आस हो
रात दिन बस यही सोचता हूँ मैं अब
जो न हो साथ तो ख़्वाब में पास हो
चाहता हूँ मैं जीना ख़ुशी से मगर
चाहता हूँ उदासी भी अब पास हो
मेरे रोने पे जिस के निकल आएँ अश्क
ज़िंदगी में कोई इतना भी ख़ास हो
— Krishan Kant Saini















