है अभी और अब नहीं ये जिस्म भी क्या चीज़ है
ख़ाक उड़ कर कह रही है ज़िंदगी क्या चीज़ है
धूप और ये चाँदनी दोनों बिखरती हैं मगर
एक चेहरे ने बताया रौशनी क्या चीज़ है
जो किया महसूस अब तक पर कभी उलझन न थी
इस मोहब्बत ने दिखाया बेबसी क्या चीज़ है
आ गया ये बोझ दिल से आँख पर जब एक दिन
याद ने समझाया हमको ये नमी क्या चीज़ है
इक ये दिल कहता रहे सब कुछ अधूरा है यहाँ
मुफ़्लिसी भी अब सुनाती है कमी क्या चीज़ है
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