मिलना ख़ता लगे लगे
चाहत सज़ा लगे लगे
उल्फ़त जफ़ा लगे लगे
ये बद-दुआ लगे लगे
क़ातिल तिरी निगाह है
सब को अदा लगे लगे
मेरी वफ़ा का मामला
तुम को ख़ता लगे लगे
सच बोलता रहूँगा मैं
जिस को बुरा लगे लगे
वो आदमी है आदमी
जिस को ख़ुदा लगे लगे
राजा नहीं वो चोर है
गर ये पता लगे लगे
दुश्मन है वो गरीब का
जिस को भला लगे लगे
वो दोस्त क्या अदू के जो
सीने से जा लगे लगे
हम सर उठा के चलते हैं
ये दबदबा लगे लगे
हैं ख़ुश्क ख़ुश्क पेड़ सब
जंगल घना लगे लगे
वो है बसा निगाह में
हम से जुदा लगे लगे
— Kumar Aryan















