लगा दिया है समझने में तजरबा सारा
मगर समझ न सके हम मुआमला सारा
रटा के पेश किया है हर एक लफ़्ज़ उसे
बयान उस ने दिया है नपा-तुला सारा
सफ़र की धूप ने ऐसा किया है हम पे सितम
बदन लिबास के अंदर से जल गया सारा
ये इम्तिहान की राहें हैं आख़िरी अपनी
कि इन के बा'द हैं आसान रास्ता सारा
थकन से चूर मैं लौटा था घर को अपने मगर
गले लगाते ही बच्चों को खिल गया सारा
मरे हुओं की भी तस्वीर खींचने के लिए
हुजूम दौड़ के आया है शहर का सारा
— MAHESH CHAUHAN NARNAULI















