आप सब सेे बताओ ये क्या कह रहे
आप हम को सुना बे-वफ़ा कह रहे
जानता है जहाँ वो फ़क़त ज़हर है
आप उस को सुना है दवा कह रहे
यार जिस ने कमाई फ़क़त बद-दु'आ
आप उस के ही हक़ में दुआ कह रहे
अब मिरा यार उस से नहीं राब्ता
आप जिस को मिरी जाँ ख़ुदा कह रहे
वो मिरे साथ में घात कर के गया
आप जिस को अभी हमनवा कह रहे
बोलता भी नहीं मौन रहता था वो
आप जिस को अभी सरफिरा कह रहे
आप कह तो रहे आप का ही है वो
सच में है आप का आप का कह रहे
'जय' तुम्हारी ग़ज़ल पर छिड़ी जंग ये
यार तुम शा'इरी को जुआ कह रहे
— Jaypratap chauhan















