चाँदनी के सहारे बड़े शौक़ से
चमचमाते हैं तारे बड़े शौक़ से
भूक जब जब लगी जिस्म की जो उन्हें
हम ने कपड़े उतारे बड़े शौक़ से
दिल हमारा बहुत क़ीमती था मगर
लुट गया दिन दहाड़े बड़े शौक़ से
ज़िन्दगी में कभी मात खाए नहीं
और उन से थे हारे बड़े शौक़ से
जिन ख़तों को कभी पास रखती थी वो
एक दिन उस ने फाड़े बड़े शौक़ से
कल तलक तो हमें आप जी जी कहा
आज कहती हो जा रे बड़े शौक़ से
जय सुना है महीने कई तुम ने भी
बेबसी में गुज़ारे बड़े शौक़ से
— Jaypratap chauhan















