गुम-शुदा और बेकार मैं हो गया
वो गई और बीमार मैं हो गया
इल्म इक भी हुनर का नहीं था मुझे
वो मिली और फ़नकार मैं हो गया
खेल खेला नहीं ज़िंदगी से कभी
इक दफ़ा खेलकर हार मैं हो गया
आज ऐसा जलाया किसी ने मुझे
देख कैसे न अंगार मैं हो गया
मानते थे कभी जो मुझे वो ख़ुदा
लो ग़ज़ब आज ख़ुद्दार मैं हो गया
बस लगाई नहीं थी नशे की तलब
अब नशे का तलबगार मैं हो गया
— Jaypratap chauhan















