यहाँ पे रोज़ मरते हैं ख़ुदा वाले
नहीं मरते मगर हाँ बद-दुआ वाले
ख़ुदा के नाम से भर जेब को अपनी
बने हैं चोर देखो मुस्तफ़ा वाले
यहाँ गीता से किस को क्या ही है लेना
उसूलों पर कहाँ हैं कर्बला वाले
ज़मीं ख़ातिर है लड़ता भाई से भाई
बने बैठे हैं दुश्मन इक पिता वाले
तुम्हें तो मौत आनी तय है इक दिन जय
किए हैं काम सारे बे-वफ़ा वाले
— Jaypratap chauhan















