मुद्दतों तक समझ नहीं आया
अब मुझे इश्क़ पर यक़ीं आया
नींद भी अब मुझे नहीं आती
तुम मिले तो मुझे यक़ीं आया
वो गया जब से मेरी यादों से
लौट कर फिर कभी नहीं आया
वो ख़ुदा अब यहाँ नहीं मिलता
हाँ किसी को दिखा कहीं आया
जब कभी ख़्वाब आँख में आए
यूँ लगा वो ही मह-जबीं आया
— Manish Yadav















