हम इतने ग़म से मरने वाले नहीं
फिर इतने कम से मरने वाले नहीं
हमको मिलेगी मौत भी किश्त में
हम एक दम से मरने वाले नहीं
लेने ख़ुदा आएँगे ख़ुद ही मुझे
हम उसके यम से मरने वाले नहीं
दिखती रहे तू सर्दियों में मुझे
हिजरत में ज़म से मरने वाले नहीं
उस कान की झुमकी पे ही मर गए
पायल की छम से मरने वाले नहीं
हम तो हमेशा ही विषम पर मरे
सच ये है सम से मरने वाले नहीं
बोसा मिला तो मर ख़ुशी से गए
दुश्मन के बम से मरने वाले नहीं
ज़ख़्मी मुझे बस दो निगाहें करे
प्यालों की रम से मरने वाले नहीं
हँसते हुए ही हम मरेंगे कभी
पर आँख नम से मरने वाले नहीं
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