यूँँ दीया इक जलाया जा रहा है
हवा को आज़माया जा रहा है
गले ऐसे लगाया जा रहा है
गला मेरा दबाया जा रहा है
कोई घोड़ी नहीं चढ़ने दिया है
दलित उसको बताया जा रहा है
जमीयत है निकलवानी हमारी
हसीं सपना दिखाया जा रहा है
दुआ उसकी असर कब तक करेगी
ये विष हर दिन पिलाया जा रहा है
बँटा इंसाफ़ अब कुछ इस तरह से
कि बुल्डोजर चलाया जा रहा है
मुनाफ़ा इस क़दर हावी हुआ है
ग़लत सब कुछ बनाया जा रहा है
हुई थी भूल सारे देश से जो
वही बोझा उठाया जा रहा है
सुना है जो सताता है ना मुझको
उसे भी अब सताया जा रहा है
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