जो ज़िंदगी जीनी थी वो जी ही नहीं

  - MIR SHAHRYAAR
जोज़िंदगीजीनीथीवोजीहीनहीं
क्याकरतातूजोहमसेफ़रथीहीनहीं
येक़िस्साजोथाहिज्रकाक़िस्साथाबस
येज़िंदगीतोज़िंदगीथीहीनहीं
करतातोकिसमुँहसेगिलाकरताभला
जबबातऐसीभीकोईथीहीनहीं
जोकहतीथीमिलतेरहेंगेमेरीजान
अबतोकहींवोलड़कीमिलतीहीनहीं
जान-ए-तमन्नाक्याअजबहैआजतक
तेरीतमन्नाभीकभीकीहीनहीं
थीज़िंदगीभरजुस्तजूजिसकीमुझे
वोशयकहींदुनियामेंदेखीहीनहीं
कितनापरेशाँथाबसइकतेरेलिए
अपनीभीहालतमैंनेदेखीहीनहीं
इसदश्त-ए-शौक़-ओ-ज़ौक़मेंहमकोमिला
वोजिसकीहमनेआरज़ूकीहीनहीं
कैसेचलाआतानहींमैंतेरेपास
तूनेमगरदिलसेसदादीहीनहीं
साँसेंमेरीसाँसोंसेउलझीहीनहीं
ख़ुशबूमेरेसाँचेमेंआईहीनहीं
देखाहैजबसेउसकोउलझा-उलझाकुछ
कुछअपनीभीहालतसुधारीहीनहीं
मैंइकग़ज़लथाइश्क़कीइकबहरमें
परमेरेमक़्तातकवोपहुँचीहीनहीं
  - MIR SHAHRYAAR
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