बिछड़े हुए तो हो गया है एक साल देख

लेकिन मैं अब भी ज़िन्दा हूँ मेरा कमाल देख

हुलिया बदल गया है ये जिस्म अब है खोखला
कैसे बदल गए मेरे हिज्र-ओ-विसाल देख

मालूम होगी तुझ को हक़ीक़त ख़ुदा की क़स्म
नज़दीक आके तो कभी तू मेरा हाल देख

अब कौन हम से पूछे तू अपना ख़याल रख
अपने हिसाब का तू कोई हम ख़याल देख

ज़ख़्म इतने बढ़ गए लहू सारा बह गया
पर सामने खड़ा हूँ तेरे मैं निढाल देख

बाक़ी हैं तेरे ख़्वाब इन आँखों में आज भी
अब तक मैं इन की कर रहा हूँ देख भाल देख

— Amaan mirza

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Kamar Shayari

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