जैसी कि हम ने सोची थी वैसी नहीं गई
ठहरी नहीं वो रात भी अच्छी नहीं गई
शादी शुदा हैं ख़ुश हैं बहुत दूसरी के साथ
लेकिन हमारे ज़ेहन से पहली नहीं गई
हम को मिटाने वाले सभी ख़ाक हो गए
उन से हमारी ख़ाक उड़ाई नहीं गई
पिछली सफ़ों में बैठने वालों में हैं शुमार
हम पर कभी किसी की नज़र ही नहीं गई
रिश्ते में थी हमारे बस अख़लाक़ की कमी
ये चीज़ दरमियान में लाई नहीं गई
— Amaan mirza















