फ़क़त अब तो दिलासा रह गया हैबताओ क्या हमारा रह गया हैनिकल कर रूह कब की जा चुकी हैबदन पंखे से लटका रह गया हैबग़ैर उस के मरा मैं भी नहीं औरबिछड़ कर वो भी ज़िंदा रह गया है— Asif gauri