विरह से विकल इस हृदय की कराहें
हमारे अधूरे मिलन और राहें
तड़प बस हमें तो रही है तुम्हारी
तुम्हारे सिवा हम किसे और चाहें
मुलाक़ात तुम से नहीं हो रही है
मुझे याद आती तुम्हारी निगाहें
यही बात हम को रुलाती रही है
नए साजना अब नई और बाहें
— Kavi Naman bharat















