aankhoñ se mere dard ke manzar chale ga.e | आँखों से मेरे दर्द के मंज़र चले गए

  - Mukesh Jha

आँखों से मेरे दर्द के मंज़र चले गए
जैसे कि माँ के पास से ज़ेवर चले गए

उसने कहा कि जंग नहीं दिल्लगी करो
मैदान-ए-जंग से सभी लश्कर चले गए

कोशिश बहुत की हमने कि तन्हा रहें न अब
जब दिल कहीं नहीं लगा तो घर चले गए

कुछ दोस्तों की याद मुझे अब भी आती है
जाने कहाँ वो सारे सितमगर चले गए

इक दौर था कि 'इश्क़ में होता था इक जुनून
इक दौर ये है 'इश्क़ के जौहर चले गए

दुनिया को देख कर यही लगने लगा है अब
बदतर यहाँ रुके रहे बेहतर चले गए

  - Mukesh Jha

Dushmani Shayari

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