आँखों से मेरे दर्द के मंज़र चले गए
जैसे कि माँ के पास से ज़ेवर चले गए
उसने कहा कि जंग नहीं दिल्लगी करो
मैदान-ए-जंग से सभी लश्कर चले गए
कोशिश बहुत की हमने कि तन्हा रहें न अब
जब दिल कहीं नहीं लगा तो घर चले गए
कुछ दोस्तों की याद मुझे अब भी आती है
जाने कहाँ वो सारे सितमगर चले गए
इक दौर था कि 'इश्क़ में होता था इक जुनून
इक दौर ये है 'इश्क़ के जौहर चले गए
दुनिया को देख कर यही लगने लगा है अब
बदतर यहाँ रुके रहे बेहतर चले गए
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