उसका चेहरा पढ़ा है दिन भर से
प्यार उमड़ने लगा है अंदर से
उसकी जादूगरी का है ये असर
फूल खिलने लगे हैं पत्थर से
मुझसे मिलती है ऐसे वो अक्सर
जैसे दरिया मिले समंदर से
उसको दिल में बसा लिया मैंने
पाँव आगे बढ़े हैं चादर से
कौन पूछे अब उसके घर का पता
लेना-देना ही क्या है घर-वर से
उसने पूछा कि क्यूँँ लिखी ये ग़ज़ल
नाम उसका नहीं लिया डर से
सारी दुनिया उदास रहती है
वो अगर हट गया हो मंज़र से
वो उतरती गई मेरे दिल में
ज्यूँँ उतरती है ओस अंबर से
फिर अचानक बदल गया मौसम
उसने ज़ुल्फ़ें झटक दी हैं सर से
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