जब वो मेरे साथ हो गई
रौनक़ें सबात हो गई
तेरा साथ क्या मिला हमें
ज़िंदगी हयात हो गई
दिल से दिल जुड़े हुए हैं यूँ
दिल से दिल की बात हो गई
ना-उमीद थे मगर किया
इंतिज़ार रात हो गई
सरकशी ये बे-सबब रही
इक हँसी पे मात हो गई
इक दफ़ा की दीद के सबब
उम्र की नशात हो गई
यूँ तो वो मिरी न हो सकी
बा-तसव्वुरात हो गई
— Muntazir shrey















