सुना है ख़ूब-सूरत है पहाड़ों से सटी उस पार की दुनिया
हमारी भी सो हसरत है पहाड़ों से सटी उस पार की दुनिया
ये दुनिया गर दिखावा है तो फिर रग़बत भी कैसी इस दिखावे से
हमारी तो मोहब्बत है पहाड़ों से सटी उस पार की दुनिया
भला क्या हम-ख़याल अपना मिलेगा ढूँढ़ने पे हम-सफ़र मुझ को
यहाँ और किस की चाहत है पहाड़ों से सटी उस पार की दुनिया
मोहब्बत में मिरा नाकाम होना भी मुक़द्दर ही सही लेकिन
मिरी शायद से क़िस्मत है पहाड़ों से सटी उस पार की दुनिया
दिल-ए-मजरूह गर ख़ल्वत की जुस्त-ओ-जू में कोई करता है हिजरत
हमारी भी नसीहत है पहाड़ों से सटी उस पार की दुनिया
— Muntazir shrey















