ऐ उदास लड़की
जहाॅं से रूठी हुई ऐ उदास लड़की तुझे
ख़बर नहीं तिरा हुस्न ओ जमाल ढल रहा है
कई बरस से बदन पे वही दरीदा लिबास
तेरा ये चेहरा मगर पैरहन बदल रहा है
निगाह से नज़र आता है मुंतज़िर है तू
लबों पे वज़्न-ए-गोहर गर्द-ए-राह ख़्यालों पर
अगर कभी कोई जो गुफ़्तगू करे तुम से
तो होगी इब्तिदा और इंतिहा सवालों पर
तेरे मिज़ाज में ये ख़ामोशी न थी पहले
मैं जानता हूँ कि इस का तवील सिलसिला है
तमाशबीन कोई भी क़यास कर लेगा
ये कम सुख़न किसी ग़म में ज़रूर मुब्तिला है
उमीद-ए-यार में बुझती हुई ये चश्म-ए-तर
इसी गुमान में तू कब तलक जलाएगी
भुला के दहर तू जिन साअ'तों में खोई है
न कट सकेंगी मगर उम्र बीत जाएगी
सराब-ए-नक़्श इस उम्मीद के मिटा दो तुम
मैं शहर-ए-ख़्वाब के ख़ाकों में रंग भर दूँगा
मैं जानता हूँ कि मुश्किल है पर तू मेरी तरफ़
क़दम बढ़ा मैं तुम्हें फिर हसीन कर दूँगा















