मैं भी राह तकता हूँ तुम भी राह तकती हो
मैं हूँ मुंतज़िर तेरा और तुम किसी की हो
मैं कुछ और समझा हूँ तुम ने कुछ बताया था
मैं ने कुछ बताया था तुम कुछ और समझी हो
वस्ल की ख़ुशी भी है ग़म भी है बिछड़ने का
साथ-साथ बारिश के जैसे धूप निकली हो
तुम फ़राज़ पढ़ती हो और जौन सुनती हो
तोड़ मोड़ मिसरे वो अपने शे'र कहती हो
— Naaz ishq















