चीज़ कोई भी अपनी जगह न मिलती घर मेंजब से माँ की जगह हुई है ख़ाली घर मेंजब से बहन हुई है रुख़्सत और पिता जीतब से मुझ को याद आती है घर की घर में— Naaz ishq