कल रात भी हमारी कटी दम-ब-दम उदास
दिन भी अभी शुरू हुआ है और हम उदास
मैं ख़ुद-कुशी की रेल में बैठा ख़ुशी ख़ुशी
मैं जाते जाते कर गया हूँ सारे ग़म उदास
जितना मैं तुम से दूर हुआ उतना ख़ुद के पास
सो हर क़दम मैं ख़ुश हुआ हूँ हर क़दम उदास
दुनिया में अस्ल में कोई भी ख़ुश नहीं है दोस्त
कोई उदास ज़्यादा है तो कोई कम उदास
समझो किसी के साथ मेरी शादी हो गई
समझो कि उस के कट गए सातों जनम उदास
गर छोड़ कर नहीं गया तुम को कोई कभी
तो किस सबब से 'नाज़' फिर इतनी रक़म उदास
— Naaz ishq















