ज़माने की नज़र से माँ ज़माना देख लेती हैजहाँ महफ़ूज़ हो रहना ठिकाना देख लेती हैजो बेटी बन के जाती है किसी के नाम की दुल्हनविदा करने से पहले माँ घराना देख लेती है— Naimish trivedi