भला क्या कर गया है दिल

जो ऐसे डर गया है दिल

मिला क्या प्यार में इस को
लहू से भर गया है दिल

बहुत ख़ामोश रहता है
लगेगा मर गया है दिल

सुना है उस की चौखट तक
लगाकर पर गया है दिल

किसी के दस्ते नाज़ुक पर
यूँ ख़ुदको धर गया है दिल

नज़र के सामने से फिर
नया मंज़र गया है दिल

लिए जम्बील हाथों में
कहाँ दर-दर गया है दिल

— Navneet krishna

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