अश्किया लोग थे नख़चीर उठा लाते थेजाँ फ़ना करने को शमशीर उठा लाते थेमैं परिंदों के क़फ़स तोड़ दिया करता थाये लहू से सनी ज़ंजीर उठा लाते थे— Nikhil Tiwari 'Nazeel'