इतना आसान काम कौन करे
हमको रुक के सलाम कौन करे
तुम ही बोलो हमारी यादों में
अपनी नींदें हराम कौन करे
ज़िंदगी छोड़ो एक शब तक भी
मुझ सेे आशिक़ के नाम कौन करे
तुमको जाना है तो बिछड़ जाओ
इसपे जीवन विराम कौन करे
ऐसे आशिक़ हज़ार मिलते हैं
आपके साथ शाम कौन करे
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