"बहनों के नाम"

ये तिजारती मोहब्बतें जो चल रही हैं बाज़ार में
ऐसा ही एक मसअला आज छपा है अख़बार में
ये सूरत ये सीरत ये तहक़ीक़ फिर तस्दीक़ बंदे की
बहनों का ज़िम्मा है कि इसे सीख लें परिवार में
वादे साथ निभाने के और क़स
में जीने मरने की
सस्ते असासा हो गए हैं इश्क़ के कारोबार में
नहीं देखा जाएगा अश्कों का दरिया बूढ़ी आँखों में
कुछ आँखों के तारे हैं न ख़ाक हों बेकार में
चप्पलें घिस जाती हैं अदालतों के चक्कर में
ख़बर नहीं किसे क्या मिलेगा इस दौर की सरकार में

— Niteesh Upadhyay

More by Niteesh Upadhyay

Other nazm from the same pen

See all from Niteesh Upadhyay →

Dariya Shayari

Shers of dariya.

All Dariya Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling