इस सेे पहले के मेरा ज़ेहन सँभाले मुझ को
ये तेरी सादा-दिली मार न डाले मुझ को
नींद कर देती है ख़्वाबों के हवाले मुझ को
बंद आँखों से भी दिखतें हैं उजाले मुझ को
मुंतज़िर हूँ वो किसी तौर मुझे याद करे
फेसबुक में ही सही ढूँढ़ निकाले मुझ को
देखता हूँ बड़ी उम्मीद से दुनिया की तरफ़
मौसम ए हिज्र से कोई तो बचा ले मुझ को
एक दिन तुझ को दिखाऊँगा मैं दिन में तारे
तब तलक ज़िंदगी चाहे तो नचा ले मुझ को
— Om awasthi















