हम जब कहती हैं मेरी आँखें
दुख में बहती हैं मेरी आँखें
चिट्ठी ख़त सब यादों के ग़म को
तेरे सहती हैं मेरी आँखें
पूछो कभी तो इनसे कितना कुछ
तुम से कहती हैं मेरी आँखें
तेरी भी हैं क्या इंतिज़ार में
जैसे रहती हैं मेरी आँखें
तेरी आँखों में पंकज वो क्या
अब भी रहती हैं मेरी आँखें
— Pankaj murenvi















