श्वास तुम को पुकारे हे मोहन
नैन तुम को निहारे हे मोहन
देख लेंगे घड़ी ये विरह की
सुख दिए भी तुम्हारे हे मोहन
नाव मँझधार में ये खड़ी है
तुम लगादो किनारे हे मोहन
— Pankaj murenvi
नैन तुम को निहारे हे मोहन
देख लेंगे घड़ी ये विरह की
सुख दिए भी तुम्हारे हे मोहन
नाव मँझधार में ये खड़ी है
तुम लगादो किनारे हे मोहन
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