na waqt se pal pighal raha hai na aasmaañ ye machal raha hai | न वक़्त से पल पिघल रहा है, न आसमाँ ये मचल रहा है

  - Prashant Beybaar

न वक़्त से पल पिघल रहा है, न आसमाँ ये मचल रहा है
मेरे ये हालात जम गये हैं, ये साल लेकिन बदल रहा है

घटा की जुम्बिश हवा की हरकत, कहीं किसी को तो चैन आए
ये पाँव बेहिस यहीं रुके हैं, ये दिल कहीं दूर चल रहा है

किसी ने दी थी ख़बर तुम्हारी, घड़ी पे मेरी नज़र टिकी है
ये जाँ है रह-रह तड़प रही है, ये दिल है तब से बहल रहा है

कोई पुराना ख़ज़ाना जैसे, तेरा वो ख़त भी रखा हुआ है
वो याद तेरी गुज़र रही है, ये दर्द मेरा सँभल रहा है

  - Prashant Beybaar

Hawa Shayari

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