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तेरे चेहरे पे हारे जा रहे हैं  - Prashant Sitapuri

तेरे चेहरे पे हारे जा रहे हैं
सब आँखों के इशारे जा रहे हैं

कभी ये चैन से कटते थे यारों
मगर अब दिन गुज़ारे जा रहे हैं

मुहब्बत से सभी हैं दूर, यानी
नये लड़के सुधारे जा रहे हैं

उतारूंगा समंदर में भी कश्ती
अभी तो बस किनारे जा रहे हैं

अदब रख, बंदगी कर, सर झुका, आज
बड़े बूढ़े हमारे जा रहे हैं

- Prashant Sitapuri

Mohabbat Shayari

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