तुम्हें देख कर मैं नें दिल से कहा है
कि हद से ज़ियादा मोहब्बत बला है
अदाएँ मोहब्बत में होती हसीं हैं
बताओ मुझे तुम में क्या कुछ नया है
मुझे अपनी दुनिया बनानें से पहले
तुझे कुछ है मालूम दुनिया में क्या है
कि मुझ पे भरोसा न कर भोली लड़की
मेरा इस जहाँ से भरोसा उठा है
किसी ने था पूछा कि क्या है मोहब्बत
मैं ने कह दिया था मोहब्बत सज़ा है
मैं ने कब कहा की मेरी मानियेगा
मैं ने तो बस अपना तजुर्बा कहा है
— Prashant Sitapuri















