vaise to sab kuchh achha chaltaa hai | वैसे तो सब कुछ अच्छा चलता है

  - Prashant Sitapuri

वैसे तो सब कुछ अच्छा चलता है
और अचानक फिर मुर्दा चलता है

मैं आगे चलता रहता हूँ लेकिन
मुझ सेे आगे ये रस्ता चलता है

जब से बिछड़े हैं हम यारों उस सेे
दिल जाने दिल में क्या क्या चलता है

वो मान रहा है गर सारी बातें
तो ताज़े 'इश्क़ में इतना चलता है

हर बार अगर मैं ही झुकता हूँ तो
एक तरफ़ से क्या रिश्ता चलता है?

सीख रहे हो तो चालाकी सीखो
ईमान बहुत ही सस्ता चलता है

दो चार घड़ी हम हँस लेते हैं पर
वक़्त बुरा ही अब ज़्यादा चलता है

मेरे यार मुहब्बत की बस्ती में
अब केवल झूठ का सिक्का चलता है

ये पेट का जादू है या ताक़त है
सब भूखा थकता इंसा चलता है

  - Prashant Sitapuri

Hausla Shayari

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