इस उम्र के ये ज़ुल्म-ओ-सितम हम सेे पूछिए
रूठा हुआ है अब्र-ए-करम हम से पूछिए
बचपन में ही बिछड़ गया हम से ये बचपना
वालिद के खोने का ये अलम हम से पूछिए
जो आप रोए आप की ज़िद पूरी हो गई
गोया खिलौने का ये अलम हम से पूछिए
रो देते भी हैं देख के फ़िल्मों की ट्रेजडी
कितना हमारा दिल है सुगम हम से पूछिए
पड़ जाती है नज़र किसी जफ़्ती पे किस ख़याल
बढ़ जाते हैं हमारे क़दम हम से पूछिए
जो पास भी नहीं है मगर लगता है कि है
रिश्ता-ए-जाँ का रखना भरम हम से पूछिए
ख़्वाबों के ज़ख़्म हो गए नासूर टुकड़ों में
कैसे निकल रहा है ये दम हम से पूछिए
बिल्कुल नहीं इरादा जिसे भूलने का भी
करती हैं यादें कैसे सितम हम से पूछिए
'प्रेमी' जो देख लें अभी तो कह के या-ख़ुदा
बढ़ जाएँगे सो उन के क़दम हम से पूछिए















