कोई तो ख़बर छापिए अख़बार-निगारो
इन दिल के मरीज़ों को कभी कोई पुकारो
मैं अपना सनम नाम-ओ-नसब भूल गया हूँ
उस नाम से जाँ एक दफ़ा मुझ को पुकारो
बीनाई मिरी लुत्फ़ की अब दीजिए लौटा
ऐ कलियाँ बहार और सियाहत के नज़ारो
ऐ मेरे मुख़ातिब मैं इक अरसे से हूँ ख़ामोश
दिल की सुना लूँ आज यहीं रात गुज़ारो
ये हिज्र मनाया है बिना वस्ल के मैं ने
ये बात मगर माने कोई लाख पुकारो
— Naresh sogarwal 'premi'















