"मैं मिलूँगा तुम्हें"
दुनिया की परेशानियों से दूर
मैं मिलूँगा तुम्हें किसी जंगल में
तुम्हारे लिए नज़्में लिखता हुआ
अपनी क़लम में तुम्हारे
प्यार का रस भरता हुआ
पेड़ों से फूलों से तितलियों से
तुम्हारी बातें करता हुआ
मैं मिलूँगा तुम्हें तुम्हारे ख़्वाब में
मैं मिलूँगा तुम्हें बादलों में
मैं मिलूँगा तुम्हें हवाओं में
मैं मिलूँगा तुम्हें खिलती धूप में
हर रंग में हर रूप में
हर गली में हर गाँव में हर शहर में
मैं मिलूँगा तुम्हें हर जगह
पर?
अगर कभी ऐसा हो कि
मैं तुम्हें कहीं भी दिखाई ना दूँ
तो सब से आसान तरीक़ा है
मुझ से मिलने का
तुम अपने अंदर झाँक लेना
मैं मिलूँगा तुम्हें तुम्हारे ही अंदर
तुम्हें प्यार करता हुआ
तुम्हारा ख़याल रखता हुआ
तुम्हारे लिए जीता हुआ
तुम्हारे लिए मरता हुआ
मैं मिलूँगा तुम्हें तुम्हारे ही अंदर















