'ishq ab bhi hai par teri chaahat nahin | 'इश्क़ अब भी है, पर तेरी चाहत नहीं

  - Prit

'इश्क़ अब भी है, पर तेरी चाहत नहीं
तू ज़रूरी है लेकिन ज़रूरत नहीं

दिल लगा कर दगा हम नहीं करते हैं
बे-वफ़ाई हमारी रिवायत नहीं

छोड़ दूँ, भूल जाऊँ, ये मुमकिन नहीं
तू मेरे दिल की धड़कन है, आदत नहीं

अपने हाथों से तू ने गँवाई है जाँ
तुझ से अब पहले जैसी मोहब्बत नहीं

तू मेरा हो के भी कौन सा मेरा था
यानी तुझ से मेरी कोई फ़ुर्क़त नहीं

तू मिला तो तुझे अपना लेंगे मगर
'प्रीत' अब तुझको पाने की हसरत नहीं

  - Prit

Aarzoo Shayari

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