Prit
Prit
Nazm

“नसीहत”

बदन कीड़ों से भर जाए
तेरा आशिक़ भी मर जाए
न होगा जब कोई भी पास
न डालेगा कोई जब घास
हो मेरे इश्क़ का एहसास
लगाना "प्रीत" को आवाज़
मैं आऊँगा ये बतलाने
कि मैं सच कहता था तुम से
ये दुनिया झूठ है जानाँ
हवस का खेल है इस को
मोहब्बत मत समझ जाना
नहीं तो फिर बुरा होगा
मगर सुनती कहाँ थी तुम
जहाँ नफ़रत वहाँ थी तुम
सो नफ़रत ही से खेलो तुम
मेरा दिल तोड़ने वाली
तुम्हारा टूटा, झेलो तुम

— Prit

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