"सच में तुम बेहद अच्छी हो"
सब से प्यारी तुम लगती हो
बस मुझ
में ही गुम लगती हो
वैसे ये दुनिया जँचती है
पर दुनियाँ में तुम जँचती हो
सच में तुम बेहद अच्छी हो
इतनी अच्छी पूछो ही मत
जैसे कोई चाँद सितारा
जैसे माँ का बच्चा प्यारा
जैसे रौशन रस्ता लगता
वैसा रौशन तेरा दिल है
शायद मेरी तू मंज़िल है
तुझ को खोजा हर पल मैं ने
हर इक घर में, हर दरवाज़े
लेकिन तुम मेरे दिल में हो
मेरी आँखों में रहती हो
पर मैं ठहरा पागल लड़का
सच को तो मैं अब हूँ समझा
और कहीं तू होती कैसे
मेरे ही दिल में बसती हो
सच में तुम बेहद अच्छी हो
— Kaviraj " Madhukar"















