हक़ीक़त है यही रौनक मैं वापस अब न आऊँगा
मैं सब सेे दूर काफ़ी दूर अब सपने में जाऊँगा
करो बदनाम तुम मुझको मुझे ताना सुनाओ अब
मैं अब गुमनाम होकर नाम बस अपना कमाऊँगा
अगर पैसा न हो तो लोग सारे छोड़ जाते है
अरे ये बात है सच और सच सबको बताऊँगा
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Raunak Karn
our suggestion based on Raunak Karn
As you were reading Sach Shayari Shayari