mohabbat ke alaava yaar maine kuchh nahin socha | मोहब्बत के अलावा यार मैंने कुछ नहीं सोचा

  - Ravi 'VEER'

मोहब्बत के अलावा यार मैंने कुछ नहीं सोचा
करूँगा क्या, गया जो हार मैंने कुछ नहीं सोचा

मुझे भी चाहने वाले बहुत से लोग रहते हैं
मेरा भी है कोई घर-बार मैंने कुछ नहीं सोचा

मिसालें थी कई की हारना तय है मोहब्बत में
मगर मैं था दिल-ए-बीमार मैंने कुछ नहीं सोचा

यक़ीं जब आ गया मुझको हुआ बर्बाद मैं कितना
बहुत रोया सर-ए-बाज़ार मैंने कुछ नहीं सोचा

गया करके सितम वो 'वीर' दोबारा नहीं लौटा
किया मैंने उसी से प्यार मैंने कुछ नहीं सोचा

  - Ravi 'VEER'

Aadmi Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Ravi 'VEER'

As you were reading Shayari by Ravi 'VEER'

Similar Writers

our suggestion based on Ravi 'VEER'

Similar Moods

As you were reading Aadmi Shayari Shayari