इक नया पत्ता 'शजर' में आ गया है
साल दोबारा ख़बर में आ गया है
मुफ़लिसी के दौर में मुश्किल बढ़ाने
इक नया मेहमान घर में आ गया है
अब कहाँ है नीम वो आँगन पुराने
गाँव तो सारा शहर में आ गया है
इश्क़ के क़िस्से हुए है आम जब से
हर तरफ़ शायर नज़र में आ गया है
रात भर जिसने रुलाया था मुझे, वो
लौटकर मिलने सहर में आ गया है
'वीर' कैसे पार अब वो आएगा, जो
इश्क़ की क़ातिल लहर में आ गया है
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