जिस ने उस को जैसा जाना
उस ने उस को वैसा माना
तुझ को क्या बतलाऊँ मुर्शिद
तेरा ही सब ताना-बाना
दरिया से तुम जा कर पूछो
चाहे सब सहरा हो जाना
टेबल पर है प्याला मय का
ऑर्डर है इक बॉटल लाना
पेट भरे पे सोच रहा है
खाऊँ या फिर फेंकूँ खाना
'तन्हा' जीना कितना मुश्किल
घावों पर हो नमक लगाना
— Tanha















