अव्वल अव्वल तो लगेगा तुम्हें तन्हा तन्हा
आख़िरी वक़्त में रह जाएगी दुनिया तन्हा
यार तन्हाई उसी वक़्त सँभल सकती थी
गर बता देता वहीं तन्हा है पहला तन्हा
मेरी ग़ुर्बत मुझे दुनिया नहीं होने देगी
तुझ को होने नहीं देगा कभी पैसा तन्हा
कितनी मासूम है इक तरफ़ा मोहब्बत वैसे
खेलता रहता है मैदान में बच्चा तन्हा
एक मजबूरी बुलाती है सदा दे देकर
हो गया आगे बढ़ो हाँ भई अगला तन्हा
— Rishabh Sharma















