आशिक़ी में जीत जाने का सहारा भी हो सकता है
उसकी आँखों की नमी कोई दिखावा भी हो सकता है
उसकी ख़्वाहिश पूरी करने को सितारों टूट जाओ अब
आसमानों में चमकना तो दुबारा भी हो सकता है
यानी सबकुछ तुमपे निर्भर है कि तुम कैसे हो उसके साथ
उसका लहजा पल में ही मीठे से ख़ारा भी हो सकता है
मुझको उसका तो पता है उसको मैं ही सब सेे प्यारा हूँ,
मेरा क्या है मुझको कोई और प्यारा भी हो सकता है।
छोड़ने का फैसला क्यूँँ कर लिया तुमने अकेले ही,
दोस्त ऐसे फ़ैसलों में इश्तिशारा भी हो सकता है।
कर रहे हो आशिक़ी तुम फ़ायदे का सोचकर साहिर,
दो मुँही तलवार है इस
में ख़सारा भी हो सकता है।
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Saahir
our suggestion based on Saahir
As you were reading Tanhai Shayari Shayari