aashiqi men jeet jaane ka sahaara bhi ho saka hai | आशिक़ी में जीत जाने का सहारा भी हो सकता है

  - Saahir

आशिक़ी में जीत जाने का सहारा भी हो सकता है
उसकी आँखों की नमी कोई दिखावा भी हो सकता है

उसकी ख़्वाहिश पूरी करने को सितारों टूट जाओ अब
आसमानों में चमकना तो दुबारा भी हो सकता है

यानी सबकुछ तुमपे निर्भर है कि तुम कैसे हो उसके साथ
उसका लहजा पल में ही मीठे से ख़ारा भी हो सकता है

मुझको उसका तो पता है उसको मैं ही सब सेे प्यारा हूँ,
मेरा क्या है मुझको कोई और प्यारा भी हो सकता है।

छोड़ने का फैसला क्यूँँ कर लिया तुमने अकेले ही,
दोस्त ऐसे फ़ैसलों में इश्तिशारा भी हो सकता है।

कर रहे हो आशिक़ी तुम फ़ायदे का सोचकर साहिर,
दो मुँही तलवार है इस
में ख़सारा भी हो सकता है।

  - Saahir

Tanhai Shayari

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