gamon ko yuñ chhup | ग़मों को यूँँ छुपाना है

  - Saahir

ग़मों को यूँँ छुपाना है
मिलो तो मुस्कुराना है

जबीं को चूम कर बोली
निशाँ सबको दिखाना है

निगाहें फेर कर रखना
बड़ा तीखा निशाना है

कोई आवाज़ है या फ़िर
कहीं बाजे तराना है

पलस्तर गिरने पर समझा
मकाँ काफी पुराना है

डराए जो मुझे शब तो
तुम्हें सूरज ले आना है

बता दो, आप, तुम या तू
तुम्हें कैसे बुलाना है

कहाँ उलझा हुआ हूँ मैं
ये कैसा ताना बाना है

ग़मों पर रो रहे हो क्यूँ
ये दुनिया इक फ़साना है

भरी चाबी ख़ुदा ने जो
क़ज़ा तक चलते जाना है

ये गीता ने सिखाया है
कि मक़सद मोक्ष पाना है

  - Saahir

Tanz Shayari

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