क्यूँँ छुपा रही हो तुम ख़ुद को सिमरन
मुझको तुम अच्छी लगती हो सिमरन
काम बनाया मैने मुहब्बत को यूँँ
दो बोसे तनख्वाह है मुझको सिमरन
कुछ दिन से उदास हैं मेरी आँखें
कुछ दिन से नहीं देखा तुमको सिमरन
सबने मुझको दर्द दिया तेरे बाद
हँसकर मैने जलाया सबको सिमरन
तुमने राधा को देखा है क्या दोस्त
मेरी नज़र से यूँँ दिखती हो सिमरन
लगा लिया काज़ल तेरे जैसे ही
मेरी ओर ज़रा सा देखो सिमरन
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